A properly written Poem by Mr. Anil Sinha ( A famend Poet and Author of India )
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कल्पना नहीं ये हकीकत हैं
ये दुनिया बहुत ही खूबसूरत हैं !
ये नदी नाले पहाड़ व पर्बत
घनेरे जंगल की छाया में मधुर चिडियो का कलरव हैं !
तरह तरह के वन के प्राणी
ये वन के प्राणी इस वन की शोभा हैं !
यहाँ ऊँची ऊँची इमारते
सुन्दर सुन्दर भवन और धरोहर दुनिया के हैं !
विभिन्य कार्य में जुटे ये हलचल मानवजाति का हैं !
बच्चे जवान और बूढ़े सभी अपने कामों में मगन हैं
कितना सुखी सम्पन्न खुशहाल ये दुनियाँ हैं !
अब आपस की बैर हमारी, घोर संकट को लाया हैं !
ऐसा तनाव का माहौल बनरहा विश्वयुद मंडराया हैं !
जब नहीं झुकने को तैयार हैं कोई तो युद्ध तो होनी हैं !/
विनाश काल में विपरीत बुद्धि तो होनी ही हैं !
एक ने बम फेंका तो जवाब में दूजे ने भी फेंका हैं !
एक का दुश्मन दूजे का दोस्त बनकर उसने भी बम फेंका
और देखते देखते छिड़ी विश्व युद्ध की लड़ाई हैं !
सबने अणु बमो का खोल जखीरा एक दूजे पे बरसाई हैं
चारो तरफ हाहाकार मची हैं लाशो की अम्बार लगी हैं !
महल अट्टालिकाएं टूट कर खंडहर बनी ये दुनियाँ हैं
क्या जंगल क्या गांव शहर सभी जगह सिर्फ आग का गोला हैं !
आन बान के टक्कर में आज पूरी दुनियाँ कब्रिस्तान
बनी हैं !
ना कोई इंसान बचा ना कोई जानवर और पंछी हैं !
निस्तब्ध हुई ये दुनियाँ
सारी दुनियाँ वीरान पड़ी हैं !
ये उस हकीकत की कल्पना हैं जो होने वाला हैं
बचा सको तो बचा लो इस दुनियाँ को ये अरज दुनियावालो वालो से हैं !!!
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