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JNU Veg Non Veg Controversy: जूएनयू वेजिटेरियन और नॉन-वेजिटेरियन खाने के लिए अलग-अलग जगह को लेकर विवाद ने काफी तूल पकड़ लिया. जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन ने इसे विभाजनकारी कदम करार दिया. इस नोटिस को बाद में वापस ल…और पढ़ें


हाइलाइट्स
- जेएनयू वेज नॉन-वेज खाने के लिए अलग जगह को लेकर विवाद ने काफी तूल पकड़ लिया.
- जेएनयू स्टूडेंट्स यूनियन ने इस नोटिस को विभाजनकारी कदम करार दिया.
- जेएनयू प्रशासन की तरफ से इस तरह के नोटिस को लेकर जांच के आदेश दे दिए.
JNUSU ने सीनियर वार्डन से संपर्क किया, जिन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें इस तरह के किसी निर्णय की जानकारी नहीं थी. वार्डन ने आश्वासन दिया कि इस “विभाजनकारी कदम” की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी, जो यह पता लगाएगी कि क्या मेस सचिव, मेस प्रबंधक या हॉस्टल अध्यक्ष ने इस नीति को लागू करने की कोशिश की. JNUSU ने इसे अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की ओर से कैंपस के “भगवाकरण” और समावेशी संस्कृति को नष्ट करने का हिस्सा बताया.
यूनियन ने कहा कि जेएनयू में “फूड पुलिसिंग” का कोई इतिहास नहीं रहा और यह कदम छात्रों को बांटने की साजिश है. छात्रों के विरोध के बाद नोटिस को वापस ले लिया गया और सीनियर वार्डन ने जांच का वादा किया. JNUSU ने इसे नफरत और विभाजन की राजनीति का हिस्सा बताते हुए कहा कि वे ऐसे किसी भी प्रयास का कड़ा विरोध करेंगे. इस घटना ने जेएनयू की समावेशी पहचान को लेकर बहस छेड़ दी है, जहां खानपान की आजादी को व्यक्तिगत पसंद और सांस्कृतिक विविधता का हिस्सा माना जाता है. दिल्ली पुलिस ने अभी तक इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की है, लेकिन कैंपस में तनाव बरकरार है.


पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें
पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और… और पढ़ें
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